फिल्मः- ‘हैलो’
निर्देशकः- अतुल अग्निहोत्री
कलाकारः- श्रमन जोशी, अमृता अरोड़ा, सोहेल खान, अरबाज खान, गुल पनाग, भारती आचरेकर, सलमान खान।
कुछ कहानियां पढ़ने में मजेदार होती है, लेकिन फिल्में कहानी कहने का अलग जरिया है और सभी कहानियां फिल्में बनाने के लिए नहीं लिखी जाती। फिल्म ‘हैलो’ के साथ भी यही परेशानी पेश आती है।
अतुल अग्निहोत्री द्वारा निर्देशत फिल्म ‘हैलो’ मशूहर लेखक चेतन भगत की किताब ‘वन नाइट एट द कॉल सेंटर’ पर आधारित है। इस पटकथा के आधार पर बनी ये फिल्म सिनेप्रेमियों को ज्यादा देर तक बांधे नहीं रखती। ‘हैलो’ में कॉल सेन्टर में काम करने वाले लोगों की जिन्दगी को दिखाने की बचकानी कोशिश की गई है।
निर्देशक अतुल अग्निहोत्री के निर्देशक क्षमता को देखें, तो साफ पता चलता है कि फिल्म ‘हैलो’ के पहले भाग में कोई कहानी ही नहीं है। किरदारों का परिचय कराने में ही पहला भाग निकल जाता है, जिसके लिए 15 मिनट का वक्त भी काफी हो सकता था।
‘हैलो’ में एक कॉल सेन्टर में घटित एक रात की कहानी कही गई है। कॉल सेन्टर में काम करने वाले शख्स श्याम (श्रमन जोशी) की प्रेमिका प्रियंका (गुल पनाग) उससे दूर होती जा रही है। श्याम का करियर भी पटरी पर से धीरे-धीरे उतर रहा होता है।
श्याम की प्रेमिका प्रियंका (गुल पनाग) खुद भी कॉल सेन्टर में काम करती है, लेकिन उसकी मां (भारती आचरेकर) एक अमीर अप्रवासी भारतीय से अपनी बेटी की शादी करना चाहती है।
इसके बाद, फिल्म में आते हैं कुछ नए किरदार। एक उभरती मॉडल ईशा (ईशा कोप्पिकर) को अपना करियर बनाने के लिए सुनहरे मौके की तलाश होती है। वरुण उर्फ व्रूम (सोहेल खान) ईशा को चाहता है, लेकिन ईशा का ध्यान सिर्फ करियर पर होता है। राधिका (अमृता अरोड़ा) के पति (अरबाज खान) का किसी और के साथ संबंध होता है।
कॉल सेन्टर में काम करने वाले और बाकी लोगों का संसार बिखरने की कगार पर होता है। फिल्म की पटकथा कमजोर होने के साथ कॉल सेन्टर में काम करने वाले लोग कॉलेज जाने वाले युवा जैसे लगते हैं।
अफसोस की बात है कि निर्देशक अतुल अग्निहोत्री इस फिल्म के जरिए कुछ परोस नहीं पाए हैं। हालांकि, साजिद-वाजिद का संगीत बेहतर बन पड़ा है। सलमान पर फिल्माए गए गीत ‘बैंग-बैंग’ और ‘कर ले बेबी डांस-डांस’ अच्छे बन पड़े हैं। संजय.एफ.गुप्ता की सिनेमोटोग्राफी भी बेहतर बन पड़ी है।
श्रमन और सोहेल खान का अभिनय वक्त के साथ और बेहतर दिखता है। अमृता, ईशा और गुल पनाग का अभिनय भी ठीक-ठाक बन पड़ा है। अरबाज खान का किरदार बहुत संक्षिप्त है, जबकि शरत सक्सेना जैसे मंजे हुए कलाकार ने अपना वक्त बर्बाद किया है।
सलमान खान की बात करें, तो लगता है वो मानो नींद से उठे हों। फिल्म ‘हैलो’ के पोस्टर में उन्हें जितनी अहमियत दी गई है, उतना वो फिल्म में नजर ही नहीं आते। महज एक-दो गीत और फिल्म के शुरुआत और मध्य में उनके कुछ दृश्य देखने को मिलते हैं। कैटरीना कैफ भी 5-10 मिनट के लिए फिल्म में नजर आएंगी।
कुल मिलाकर, फिल्म ‘हैलो’ काफी कमजोर नजर आती है। बॉक्स ऑफिस पर भी इसके बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद नहीं दिखती।
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