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सलमान खान पिछड़ रहे हैं

स्टार वो होता है जो अपने दम पर पहले दो-तीन दिन टिकट खिड़की पर भीड़ जुटाने का माद्दा रखता हो, इसके बाद फिल्म का चलना या न चलना फिल्म की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। ‘युवराज’ में सलमान खान जैसे सुपर सितारा हैं, लेकिन पहले दिन के पहले शो ज्यादातर शहरों में हाउसफुल नहीं हो पाए और फिल्म फ्लॉप घोषित कर दी गई। सवाल फिल्म के सफल या असफल होने का नहीं है, बल्कि सलमान की बॉक्स ऑफिस वैल्यू का है। सलमान और कैटरीना के होने के बावजूद फिल्म की ओपनिंग ठंडी रही।

मुँह चिढ़ाते आँकड़े
‘नो एंट्री’ के बाद सलमान खान की तेरह फिल्में प्रदर्शित हुईं, जिसमें से 12 फ्लॉप रहीं। ‘पार्टनर’ एकमात्र सफल फिल्म उनके खाते में दर्ज है। इन आँकड़ों से आप किसी को सुपरस्टार नहीं कह सकते। ‘क्योंकि’, ‘जानेमन’, ‘सलाम-ए-इश्क’, ‘मेरीगोल्ड’ और ‘युवराज’ जैसी फिल्में बुरी तरह फ्लॉप रहीं, जिनमें सलमान मुख्य भूमिकाओं में थे। न ही ये फिल्में अच्छी शुरुआत ले सकीं। सलमान के मुकाबले उनके प्रतिद्वंद्वियों आमिर, अक्षय कुमार और शाहरुख खान का प्रदर्शन कहीं बेहतर रहा। इस वर्ष प्रदर्शित सलमान की चारों फिल्में (युवराज, हीरोज़, हैलो और गॉड तुस्सी ग्रेट हो) असफल रहीं।

दिमाग पर हावी दिल
दिल से फैसला करना अच्छी बात है, लेकिन व्यवसाय के मामले में दिमाग को महत्व दिया जाता है। फिल्म चुनने के मामले में सलमान दिल से फैसला करते हैं। दोस्त-यार उनकी इस आदत का फायदा उठाते हैं और खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है। जहाँ आमिर सौ में से निन्यानवे फिल्में ठुकरा देते हैं, शाहरुख और अक्षय अपनी फिल्मों के लिए कठोर परिश्रम करते हैं, वहीं सलमान फिल्म और अभिनय को हल्के तौर पर लेते हैं। सलमान की पिछले तीन-चार वर्ष में की गई फिल्में काफी बुरी थीं। जब लगातार इस तरह की फिल्में आईं तो दर्शकों और उनके प्रशंसकों ने सलमान अभिनीत फिल्मों से दूरी बना ली। नतीजतन उनकी पिछली कुछ फिल्में आरंभिक भीड़ भी नहीं जुटा सकी।

असफल फिल्में

युवराज (2008) हीरोज़ (2008) हैलो (2008) गॉड तुस्सी ग्रेट हो (2008) साँवरिया (2007) मैरीगोल्ड (2007) सलाम-ए-इश्क (2007) बाबुल (2006) जानेमन (2006) शादी करके फँस गया यार (2006) सावन (2006) क्योंकि (2005)

मूड का मामला है
सलमान के अडि़यल रवैए की वजह से बड़े बैनर उनके साथ काम करना पसंद नहीं करते। उनके मूड का कोई अनुमान नहीं लगा सकता। शूटिंग पर देर से पहुँचने की उनकी आदत है। पिछले कुछ वर्षों में बॉलीवुड की काम करने की शैली में अच्छा-खासा बदलाव आया है। अब हर सेकंड का हिसाब रखा जाता है और नखरैल कलाकारों के ‍नखरों के लिए कोई जगह बाकी नहीं है। शायद इसीलिए सलमान यशराज फिल्म्स, यू टीवी, धर्मा प्रोडक्शन जैस बड़े बैनर्स की फिल्मों में नजर नहीं आते हैं।

उम्मीद बाकी है
स्टार वैल्यू की दौड़ में सलमान पिछड़ जरूर रहे हैं, लेकिन वापसी का उनके पास पूरा मौका है। उनका लंबा-चौड़ा प्रशंसक वर्ग उनके साथ है। जरूरत है एक अच्छी और हिट फिल्म की और सलमान फिर वहीं पहुँच जाएँगे जहाँ पर वे थे। सलमान के पास कुछ अच्छी फिल्में हैं, जिनमें ‘वीर’ और ‘वांटेड डेड एंड अलाइव’ प्रमुख हैं। जरूरत है सलमान को थोड़ा प्रोफेशनल होने की, अभिनय पर ध्यान देने की और समय के साथ चलने की।

आभार--वेबदुनिया
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